योगासन (Part-1) सदाबहार जवानी का अचूक नुस्खा है हलासन…| Mix Pitara

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योग एक वैज्ञानिक व्यायाम पद्धति है. यह अपने आप में एक संपूर्ण व्यायाम है. योग के जरिये व्यक्ति को ना केवल शारारिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी मिलते है. इसकी खास विशेषता तो यह है कि इसे करने के लिए हमको किसी साधनों की जरुरत नहीं होती हैं और न ही अधिक खर्च करना पड़ता है. इसलिए हर वर्ग के लोग इसे आसानी से कर सकते है. योग में दस अलग-अलग आसन होते हैं जिसके अलग-अलग फायदे होते हैं…
ये आसन हैं… -हलासन, -सुखासन, -भुजंगासन, -बालासन, -धनुरासन, -त्रिकोणासन, -सेतुबांध आसन, -ताड़ासन, -वज्रासन, -मर्जरियासन…

दोस्तों…! योगासन के इस सीरिज में हम आपको रोज एक-एक आसन के प्रकार और उसके फायदे के बारे में बताएँगे. सबसे पहले चर्चा करेंगे हलासन की. इस आसन में शरीर का आकार खेत में चलाए जाने वाले हल के समान हो जाता है. इसीलिए इस आसन को हलासन कहा जाता हैं.

रीढ़ संबंधी गंभीर रोग अथवा गले में कोई गंभीर रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें. आसन करते वक्त ध्यान रहे कि पैर तने हुए तथा घुटने सीधे रहें. स्त्रियों को यह आसन योग शिक्षक की सलाह पर ही करना चाहिए. हलासन से हमारी रीढ़ सदा जवान बनी रहती है. मेरुदंड संबंधी ना‍ड़ियों के स्वास्थ रहने से वृद्धावस्था के लक्षण जल्दी नहीं आते. अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, अंगविकार, दमा, सिरदर्द, कफ, रक्तविकार आदि दूर होते हैं. लीवर और प्लीहा बढ़ गए हो तो हलासन से सामान्यावस्था में आ जाते हैं. इस आसन में 20-30 सेकंड तक रहा जा सकता है. धीरे-धीरे इस समय को सुविधानुसार बढ़ाया जा सकता है. इसे दो से तीन बार कर सकते हैं.

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