मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद दिल की बीमारी का खतरा, ऐसे करें बचाव | Mix Pitara

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उम्र बढ़ने से साथ-साथ महिलाओं के शरीर में होने वाले परिवर्तन में मेनोपॉज एक है. मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं. यह आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद होता है. मेनोपॉज के दौरान महिलाएं कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरती है. इस समय में तनाव, डिप्रेशन और इंसोम्निया जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेनोपॉज की समस्या महिलाओं में दिल की बीमारी का कारण भी बन सकती है. आइए जानते हैं मेनोपॉज के दौरान होने वाले ऐसे कुछ परिवर्तनों के बारे में जो महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा देते हैं.

एस्ट्रोजन का स्तर मेनोपॉज के दौरान गिर जाता है, जिससे हृदय की धमनियां सख्त हो जाती है और इस बदलाव के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल के लिए खतरा बन सकता है. मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिससे रक्त में कोलेस्ट्रॉल और फैट्स बढ़ जाते हैं. इस स्थिति में शरीर के लिए हानिकारक कैलेस्ट्रोल में बढ़ोतरी होने से दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है.

मेनोपॉजके दौरान महिलाओं के शरीर में दिखने वाले लक्षणों को दूर करने में विटामिन और मिनरल्स का अहम रोल होता है. मेनोपॉज में होने वाली हॉट फ्लेशज की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ खास तरह के विटामिन जैसे विटामिन ए, सी, मैग्नीशियाम आदि का सेवन करना चाहिए. इसके अलावा आपको अपने वजन को थोडा कंट्रोल में रखना चाहिए, क्योंकि आप का वजन जितना बढ़ता है, उतना ही वो ह्र्दय के लिए खराब होता है. साथ ही इस दौरान पर्याप्त मात्रा में ताजे फलों का सेवन करना चाहिए और मौसमी हरी पत्तेदार सब्जियों, सीमित मात्रा में वसा का सेवन करना चाहिए. बाहर का खाना और तले हुआ भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. नियमित रूप से व्यायाम ह्र्दय को स्वस्थ रखने का एक महत्वपूर्ण उपाय है. व्यायाम करने से वजन संतुलित रहता है. साथ ही ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रोल स्तर को कम करने में मदद मिलती है और इससे हमारे तनाव का स्तर भी कम होता है.

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