Cardiac Arrest : इस बीमारी से हुई अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत, जानिये क्या हैं इसके बचाव और सावधानियां..?

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कार्डिएक अरेस्ट होता क्या है, ये इंसानी शरीर के लिए इतना ख़तरनाक क्यों साबित होता है और ये हार्ट फ़ेल होने या दिल का दौरा पड़ने से कैसे अलग है..?
दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट अचानक होता है और शरीर की तरफ़ से कोई चेतावनी भी नहीं मिलती. इसकी वजह आम तौर पर दिल में होने वाली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है, जो धड़कन का तालमेल बिगाड़ देती है. इससे दिल को पंप करने की क्षमता पर असर होता है और वो दिमाग़, दिल या शरीर के दूसरे हिस्सों तक ख़ून पहुंचाने में कामयाब नहीं रहता. इसमें चंद पलों के भीतर इंसान बेहोश हो जाता है और नब्ज़ भी बंद हो जाती है. अगर सही वक़्त पर सही इलाज न मिले तो कार्डिएक अरेस्ट के कुछ सेकेंड या मिनटों में मौत हो सकती है.

दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट हर मौत का अंतिम बिंदु कहा जा सकता है. इसका मतलब है दिल की धड़कन बंद हो जाना और यही मौत का कारण है. “लेकिन इसकी वजह क्या होती है?” इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं. आम तौर पर इसकी वजह दिल का बड़ा दौरा पड़ना हो सकता है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के अनुसार दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की दिक्कतें शरीर में जब रक्त नहीं पहुंचाती तो वो कार्डिएक अरेस्ट की शक्ल ले लेता है. जब इंसान का शरीर रक्त को पंप करना बंद कर देता है तो दिमाग़ में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ऐसा होने पर इंसान बेहोश हो जाता है और सांस आना बंद होने लगता है. सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि कार्डिएक अरेस्ट आने से पहले इसके कोई लक्षण नहीं दिखते. यही वजह है कि कार्डिएक अरेस्ट की सूरत में मौत होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है.

कार्डिएक अरेस्ट की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन दिल से जुड़ी कुछ बीमारियां इसकी आशंका बढ़ा देती हैं.  कई बार छाती के ज़रिए इलेक्ट्रिक शॉक देने से इससे रिकवर किया जा सकता है. इसके लिए डिफ़िब्रिलेटर नामक टूल इस्तेमाल होता है. ये आम तौर पर सभी बड़े अस्पतालों में पाया जाता है. इसमें मुख्य मशीन और शॉक देने के बेस होते हैं, जिन्हें छाती से लगाकर अरेस्ट से बचाने की कोशिश होती है. लेकिन दिक्कत ये है कि अगर कार्डिएक अरेस्ट आने की सूरत में आसपास डिफ़िब्रिलेटर न हो तो क्या किया जाए? जवाब है, CPR. इसका मतबल है कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन. इसमें दोनों हाथों को सीधा रखते हुए मरीज़ की छाती पर ज़ोर से दबाव दिया जाता है. इसमें मुंह के ज़रिए हवा भी पहुंचाई जाती है.

ज़्यादातर लोग कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही मान लेते हैं. लेकिन ये सच नहीं है. दोनों में ख़ासा फ़र्क है. हार्ट अटैक में तब आता है जब कोरोनरी आर्टिरी में थक्का जमने की वजह से दिल की मांसपेशियों तक ख़ून जाने के रास्ते में ख़लल पैदा हो जाए. इसमें छाती में तेज़ दर्द होता है. हालांकि, कई बार लक्षण कमज़ोर होते हैं, लेकिन दिल को नुकसान पहुंचाने के लिए काफ़ी साबित होते हैं. इसमें दिल शरीर के बाक़ी हिस्सों में ख़ून पहुंचाना जारी रखता है और मरीज़ होश में रह सकता है. लेकिन जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है, उसे कार्डिएक अरेस्ट का ख़तरा बढ़ जाता है और कार्डिएक अरेस्ट में दिल तुरंत आधार पर ख़ून पहुंचाना बंद कर देता है. यही वजह है कि इसका शिकार होने पर व्यक्ति अचानक बेहोश होता है और सांस भी बंद हो जाती है.

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