योग से दूर कर सकते हैं डिमेंशिया यानि पागलपन की बीमारी | Mix Pitara

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डिमेंशिया (dementia) अंग्रेजी का शब्द है, इसका प्रयोग हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी होता है. डिमेंशिया के लक्षण कई रोगों के कारण पैदा हो सकते है. ये सभी रोग मस्तिष्क की हानि करते हैं. डिमेंशिया से ग्रसित व्यक्ति अपने दैनिक कार्य ठीक से नहीं कर पाते. इनकी याददाश्त कमजोर हो सकती है. जो रोजमर्रा के जीवन में सबसे ज्यादा दिक्कत देती है. इससे ग्रसित व्यक्ति यह भूल सकते हैं कि वे किस शहर में हैं, या कौन सा साल या महीना चल रहा है. यहाँ तक कि उन्हें कुछ बोलते हुए सही शब्द नहीं सूझता. उनका व्यवहार बदल-सा जाता है, और व्यक्तित्व में भी काफी बदलाव आ सकता है. यह भी हो सकता है के वे असभ्य भाषा या अश्लील तरह से पेश आएँ. डिमेंशिया से ग्रसित होने के बाद व्यक्ति लोगों से कटे-कटे से रहने लगते हैं.
इसलिए योग आपकी हैल्थ के लिए तो अचूक उपाय है ही साथ ही यह याददाश्त दुरुस्त रखने के लिए सहायक होता है. योगा से डिमेंशिया जैसी बीमारी तो दूर होगी ही साथ ही प्राणायाम शरीर को स्वस्थ और मस्तिष्क के लिए सर्वश्रेष्ठ दवा है. रोजाना सुबह किसी समतल जगह पर दरी या कंबल बिछाकर सुखासन की अवस्था में बैठकर नियमित रुप से रोज सुबह अनुलोम-विलोम करें. योग-प्राणायाम के बाद 10 मिनट तक ध्यान (मेडिटेशन) करें. आइए आपको बताते हैं कि किस तरह का योग-आसन करने से होगा डिमेंशिया दूर….

सबसे पहले जानते हैं डिमेंशिया जैसी बिमारी के कारण-

बता दें कि डिमेंशिया होने के दो प्रमुख कारण है- पहला है मस्तिष्क की कोशिकाओं का नष्ट हो जाना. दूसरा उम्र के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं का कमजोर होना. कई बार सिर पर कोई गंभीर चोट लगने से भी डिमेंशिया कि समस्या हो जाती है. ब्रेन ट्यूमर, अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारी से मस्तिष्क के सेल्स नष्ट हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति को डिमेंशिया हो जाता है.

कौन-से योग और प्राणायाम से दूर होगा डिमेंशिया.. 

योग आपकी हैल्थ के लिए तो अचूक उपाय है ही साथ ही यह याददाश्त दुरुस्त रखने के लिए सहायक होता है.वहीं प्राणायाम शरीर को स्वस्थ रखने के साथ आपके मस्तिष्क के लिए सर्वश्रेष्ठ दवा है. रोजाना सुबह किसी समतल जगह पर दरी या कंबल बिछाकर सुखासन की अवस्था में बैठकर नियमित रुप से रोज सुबह अनुलोम-विलोम करें. योग-प्राणायाम के बाद 10 मिनट तक ध्यान करें. आईए जानें कौन से आसन करें-
उष्ट्रासन : उष्ट्रासन से रक्त संचार बढ़ जाता है. दरअसल रीढ़ में से गुजरने वाली स्त्रायु कोशिकाओं में यह आसन तनाव पैदा करता है. इसके चलते रक्त-संचार में इजाफा होता है और याददाश्त तेज होती है. रोजाना तीन मिनट भी इस आसन को करते हैं तो इससे आपको बहुत बेनिफिट होगा.
चक्रासन : यह आसन से दिमाग की कोशिकाओं में ब्लड का प्रवाह बढ़ाने का काम करता है. इससे मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि से निकलने वाला हार्मोन दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाता है. यही वजह है कि नियमित अभ्यास आंख, मस्तिष्क आदि में लाभदायक होता है.
त्राटक : यदि आप डिमेंसिया से पीड़ित है तो पलक झपकाए बिना एकटक किसी भी बिंदु पर अपनी आंखें गड़ाए रखें. इसे ही हम त्राटक कहते हैं. त्राटक के करण मस्तिष्क के सुप्त केंद्र जाग्रत होने लगते हैं, जिस वजह से दिमाग शार्प होता है. इसके लगातार अभ्यास से याददाश्त बढ़ती है.

 

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