गर्भाशय के सूजन से भी निकलता है पेट : जानिये लक्षण, कारण और उपचार

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कई बार महिलाओं को गर्भाशय (Uterus या बच्चेदानी) में सूजन आ जाती है. जिसके कई कारण हो सकते हैं. महिलाओं के पेट के बाहर निकलने की वजह सिर्फ मोटापा नहीं, बल्कि गर्भाशय में सूजन हो सकता है.बदलते मौसम और लाइफस्टाइल गर्भाशय को अत्यधिक प्रभावित करता है. इससे महिलाएं अत्यधिक प्रभावित होती हैं. जिसका असर उनके गर्भाशय पर भी पड़ता है. आमतौर पर महिलाओं का गर्भाशय बंद मुट्ठी के बराबर होता है. जबकि प्रेगनेंसी के दौरान इसका आकार हिसाब से ज्यादा बढ़कर लगभग फुटबॉल के आकार का हो जाता है. लेकिन कई बार महिलाओं के गर्भाशय में सामान्य अवस्था में भी सूजन आ जाती है. जिसके बाद उन्हें सिरदर्द, पेट और कमर दर्द, हल्का बुखार जैसी समस्याएं होने लगती है. सामान्य अवस्था में गर्भाशय में सूजन के कई कारण हो सकते हैं. जिन्हें नजरअंदाज करना महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं गर्भाशय में सूजन के कारण और लक्षण…

गर्भाशय में सूजन के सामान्य लक्षण

गर्भाशय में सूजन के दौरान पेट का आकार बढ़ जाता है, जो बाहर से देखने में ये किसी फुटबॉल जैसा या प्रेगनेंसी वीमेन जैसा दिखता है. महिलाओं के गर्भाशय का सूजन होने पर हल्का बुखार, मितली, सिर दर्द, पेट दर्द और कमर दर्द जैसी समस्या लगातार बनी रहती है. इसके अलावा कई बार तो यूरिन के रास्ते से हल्का हल्का ब्लड भी निकल जाता है.  ऐसे लक्षणों को नजरंदाज करना खतरनाक हो सकता है. कई बार महिलाओं को बहुत समय के बाद में गर्भाशय में सूजन का पता चलता है. सूजन के दौरान सिर दर्द, बुखार और कमर दर्द जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं जिसे महिलाएं एक सामान्य दर्द समझकर उसी की दवा खाती हैं. जरूरत से ज्यादा दर्द की दवा खाना भी गर्भाशय की सूजन का एक कारण हो सकता है. आइए जानते हैं गर्भाशय में सूजन के और क्या कारण हो सकते हैं..?
– भूख से अधिक भोजन सेवन करना से गर्भाशय में सूजन का कारण हो सकता है. गलत खान-पान के कारण भी गर्भाशय में सूजन होने की संभावनाएं बन जाती हैं.
– इसके अलावा पेट में लगातार कब्ज या गैस होना भी यूटेरस में सूजन का कारण हो सकता है.  इस दौरान महिलाओं को हमेशा पेट दर्द की शिकायत होती है. इससे बचने के लिए महिलाओं को मिर्च-मसाले और तले-भुने खानों के अलावा ज्यादा मिठाई का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए.
– टाइट कपड़े पहनना भी गर्भाशय में सूजन की एक बड़ी वजह है. क्योंकि टाइट कपड़े पहनने से पेट और यूटेरस पर लगातार दबाव बना रहता है. इसलिए महिलाओं को अधिक तंग कपड़े पहनने से बचते हुए, फैशन और अपनी सुविधा के मद्देनजर कपड़े पहनने चाहिए.
– शारीरिक फिटनेस के लिए व्यायाम बहुत जरूरी है. व्यायाम न करने से पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे गर्भाशय में सूजन आ जाती है. दिनभर साड़ी पहनने वाली महिला, कुर्सी या एक जगह पर लगातार बैठकर काम करनेवाली महिलाओं में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता हैं. क्योंकि कुर्सी पर बैठने से और चौबीसों घंटे साड़ी पहनकर रखने से गर्भाशय पर दबाव बना रहता है, जिससे गर्भाशय में सूजन आ जाती है.
– कुछ महिलाएं इसे मोटापा समझकर सख्त व्यायाम करने लगती हैं. अधिक सख्त व्यायाम करने से भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है. बता दें कि असल में मोटापा के दौरान शरीर या पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने लगती है, जबकि गर्भाशय में सूजन के दौरान पेट हमेशा उस का आकार फुटबॉल जैसा लगता है.
– औषधियों का अधिक सेवन, जरूरत से अधिक सहवास (संभोग) और प्रसव के दौरान सावधानी न बरतने पर भी गर्भाशय में सूजन होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

– गर्भाशय में सूजन हो जाने पर पीड़ित महिलाओं को चार से पांच दिनों तक फलों के रस का सेवन करते हुए उपवास रखना चाहिए. इसके बाद बिना पका संतुलित आहार लेना चाहिए.
– गर्भाशय में सूजन और दर्द से ग्रसित महिला को नमक, मिर्चमसाला, तली-भुनी चीजें, मिठाईयां आदि से परहेज रखना चाहिए.
– गर्भाशय में सूजन से पीड़ित महिला को पेट पर गीली मिट्टी का लेप लगाना चाहिए. फिर एनिमा देकर गर्म पानी से स्नान करना चाहिए. इसके अलावा पानी से भरे टब में नमक डालकर 15 से बीस मिनट तक इसमें बैठने से महिला को सूजन से होने वाले दर्द से राहत मिलेगी. ऐसा लगभग रोजाना करने से गर्भाशय के सूजन से निजात भी पाया जा सकता है.
– पीड़ित स्त्री को दिन में दो से तीन बार लगभग एक घंटे के लिए अपने पैर एक फुट ऊपर उठाकर लेटना चाहिए.
– गर्म पानी में बादाम रोगन तेल एक चम्मच मिलाकर सुबह पीयें.
– अरंड (castor) के पत्तों का रस रुई में भिगोकर लगभग पांच दिनों तक योनि में लगाने से भी सूजन ख़त्म हो जाती है.
– चिरायते के काढ़े से योनि को धोएं और चिरायता को पानी में पीसकर पेडू़ और योनि पर इसका लेप करें इससे गर्भाशय की सूजन नष्ट हो जाती है.

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